छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के वोटरों के लिए चुनाव 'मोदी बनाम राहुल'

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ के अपने सभी वर्तमान सांसदों के टिकट काटने को तो काट दिए मगर पार्टी के सामने अंतरिक कलह से निपटना चुनाव जीतने से भी बड़ी चुनौती बन गई है.

इसलिए छत्तीसगढ़ में पार्टी को अब सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का सहारा ही है.

एक बड़े बीजेपी नेता ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम लोगों को कह रहे हैं आप उम्मीदवार मत देखिये. ये समझ लीजिये मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. आपको उन्हें वोट देना है."

राजनांदगांव भारतीय जनता पार्टी की सबसे प्रतिष्ठा वाली सीट है जहाँ 18 अप्रैल को मतदान होगा. ये सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और यहाँ से सांसद उनके पुत्र अभिषेक सिंह हैं.

मगर इस बार पार्टी ने न तो अभिषेक सिंह को टिकट दिया और न ही रमन सिंह को. यहाँ से पार्टी ने संतोष पाण्डेय को अपना संसदीय उम्मीदवार बनाया है.

ये रमन परिवार के लिए झटका तो था ही साथ ही में उनके क़रीबी माने जाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए भी बड़ा झटका था.

बीजेपी उम्मीदवारों को जिताने का ज़िम्मा मौजूदा सांसदों पर

छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से 10 सीटें वर्ष 2014 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की झोली में आयी थीं.

पार्टी का तर्क है कि उसने अपने सभी 'सिटिंग' सांसदों के टिकट इस लिए काटे ताकि उनके, यानी सांसदों के ख़िलाफ़ 'एंटी इनकम्बेंसी' से निपटा जा सके.

पार्टी के इस फ़ैसले से कई दिग्गज प्रभावित हुए. इनमे रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह के अलावा रायपुर के सांसद रमेश बैंस और बस्तर के सांसद दिनेश कश्यप भी शामिल हैं.

जानकारों का कहना है कि बीजेपी ने जोश में टिकट तो काट दिए मगर उसके सामने चेहरों का संकट पैदा हो गया. समस्या ये बन गई हैं कि आख़िर टिकट किसको दिया जाए जो पक्के तौर पर जीत पाए.

लेकिन टिकट तो देना था सो दे दिया. कुछ उम्मीदवार ऐसे भी निकले जिनके नाम की घोषणा तो हो गई मगर उन्हें कोई जानता तक नहीं था. नामों की सूची जारी होते ही लोगों ने फ़ौरन गूगल करना शुरू कर दिया.

फिर पार्टी ने सभी 'सिटिंग' सांसदों को ही सीट जितवाने का ज़िम्मा भी दे दिया ताकि अंतर-कलह से बचा जा सके.

राजनांदगांव सीट पर संतोष पाण्डेय को उम्मीदवार बनाकर उन्हें जितवाने की ज़िम्मेदारी अभिषेक सिंह को दे दी गई.

राजनंदगांव के पार्टी ऑफ़िस में मेरी मुलाक़ात अभिषेक सिंह से हुई. पिछली बार जब मैं उनसे मिला था- उनकी तब की 'बॉडी लैंग्वेज' और अब की 'बॉडी लैंग्वेज' में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ देखने को मिला.

हालांकि बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने पार्टी के तय किए गए उम्मीदवार को जिताने का लक्ष्य है. वो कहते रहे कि राजनांदगांव के लोग नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनता हुआ देखना चाहते हैं.

"इसीलिए हम सब मिलकर मोदी जी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए कमर कस चुके हैं."

राजनांदगांव में मौजूद बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता जो रमन सिंह और अभिषेक सिंह के लिए काम करते आये हैं, थोड़ा उदास नज़र ज़रूर आये. एक ने कहा, "अब पार्टी ने फैसला कर लिया तो क्या करें. मगर अभिषेक भैया अगर लड़ते तो जोश कुछ और ही होता."

लेकिन संतोष पाण्डेय के लिए इस सीट से चुनाव लड़ना दोहरी चुनौती है. पहली- अंतर्कलह से तो दूसरी कांग्रेस के प्रत्याशी से.

बीबीसी से फ़ोन पर उन्होंने कहा कि 'इरादे बुलंद हैं' और वो ये सीट जीतने के लिए कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं.

यहाँ पार्टी के अध्यक्ष संतोष अग्रवाल हैं. ये पूछे जाने पर कि आख़िरी क्षणों में नया उम्मीदवार देना पार्टी के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?

वो कहते हैं, "रमन सिंह भी पहली बार यहाँ से लड़े थे. फिर उनके पुत्र अभिषेक सिंह भी पहली बार ही लड़े थे. दोनों कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से जीते थे. इस बार तो नरेंद्र मोदी जी का चेहरा सामने है. लोग उन्हीं को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं इसलिए संतोष पाण्डेय के लिए जीतना मुश्किल नहीं होगा."

कांग्रेस को बीजेपी में हो रही हलचल से मज़ा आ रहा है. वो इसका फ़ायदा उठाना चाहती है और अंतर्कलह को और हवा देने की कोशिश में लगी हुई है.

कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता हर जगह चुनावी प्रचार के क्रम में बीजेपी के उन 'सिटिंग सांसदों' से सुहानुभूति का इज़हार करते दिख रहे हैं जिनके टिकट काट दिए गए हैं.

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