आम्रपाली ने ग्राहकों के 100 करोड़ रु डायवर्ट किए, इसके पीछे बड़ा रैकेट: सुप्रीम कोर्ट

आम्रपाली बिल्डर ने ग्राहकों का पैसा दूसरी कंपनियों में लगाकर बड़ा फ्रॉड किया। इसके पीछे एक रैकेट है, जिसका खुलासा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फोरेंसिक ऑडिटर की जांच के आधार पर ऐसा कहा। कोर्ट की ओर से नियुक्त ऑडिटर ने बताया कि 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम गौरीसुता इंफ्रास्ट्रक्चर्स कंपनी में डायवर्ट की गई। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि कुछ शेल कंपनियां भी बनाई गईं

आम्रपाली की 7 संपत्तियों के दस्तावेज जब्त
ऑडिटर्स ने आम्रपाली ग्रुप की 7 प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा की 6 और बिहार के राजगीर की एक संपत्ति शामिल है। बिहार के बक्सर से दस्तावेज नहीं मिल पाए। ग्रुप की कंपनियों के कई डॉक्यूमेंट भी नहीं मिल पाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के ऑडिटर्स के मुताबिक आशीष जैन और विवेक मित्तल गौरीसुता कंपनी के डायरेक्टर थे। उन्हें आम्रपाली ग्रुप के स्टैचुटोरी ऑडिटर्स का रिश्तेदार बताया गया। आम्रपाली ग्रुप ने अपने ऑडिटर्स के रिश्तेदारों को मुफ्त में फ्लैट दिए। इसलिए घोटाला दबा रहा

फोरेंसिक ऑडिटर्स ने कोर्ट को बताया कि आम्रपाली ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) चंदर वाधवा ने जांच में सहयोग नहीं किया। वाधवा ने कहा कि उसे यह याद नहीं कि बतौर सीएफओ उसने कंपनी कब ज्वॉइन की।

ऑडिटर्स के मुताबिक वाधवा को अपनी शादी की तारीख और दूसरी निजी बातें याद हैं। लेकिन, कंपनी से जुड़ी डिटेल याद नहीं। कोर्ट ने 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई में वाधवा को मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डायवर्ट की गई रकम हासिल करनी है। दोषियों का पता लगाना और जरूरी होने पर उन्हें जेल पहुंचाना भी फोरेंसिक ऑडिट का मकसद है।

कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर्स से कहा कि आपको धमकी मिलने का खतरा लगता है तो बताइए। हम इसका पूरा ध्यान रखेंगे। हालांकि, ऑडिटर्स ने कहा कि अभी तक ऐसा नहीं है।

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